शराब की दुकान में धड़ल्ले से हो रही ओवररेटिंग। वीडियो हुआ वाइरल।
शराब की दुकान में धड़ल्ले से हो रही ओवररेटिंग। वीडियो हुआ वाइरल।
अगस्त्यमुनि। यदि आप शराब के शौकीन है और शराब लेने अगस्त्यमुनि में सरकार द्वारा खोली गई शराब की दुकान पर जा रहे हैं, तो आपको या तो दुकान पर काम करने वालों के पहचान का होना आवश्यक है या आप खरीदते हुए वीडियो बना लीजिए, तभी आपको प्रिंट रेट पर शराब मिल पायेगी अन्यथा आप से वे प्रिंट रेट से कितना अधिक पैसा वसूलते हैं, इसकी कोई सीमा नहीं हो सकती है। यह साबित किया है एक ग्राहक ने, जिसने दुकान पर शराब खरीदते समय वीडियो बनाने लगा।
इस दौरान उसकी सेल्समेन से रेट को लेकर बातचीत रिकार्ड हुई है, जो कि ग्राहक ने वाइरल भी किया है। जिसमें साफ साफ सुनाई दे रहा कि ग्राहक ने सेल्समेन से एक सोलमेट की बोतल एवं एक बियर देने को कहा, तो सेल्समेन ने कुल 730 रू0 मांगे, जिसमें बियर 180 रू0, सोलमेट की कीमत 550 मांगी गई। जबकि बोतल पर 510 रू0 प्रिंट है। इसी दौरान ठेके वाले को वीडियो बनाने की भनक लग गई। वह वीडियो न बनाने को कहता है। और आपस में बातचीत कर कुल 660 रू0 काटकर बाकी पैसे वापस कर देते हैं। साथ ही कहते हैं कि आपने मास्क पहना था इसलिए पहचान नहीं पाये। यानी आप पहचान वाले हैं तो आपसे पिं्रट रेट ही लेंगे। नहीं तो ओवर रेट लेंगे। हालांकि यह छूट सभी पहचान वालों के लिए हो यह निश्चित नहीं है हां साथ में वीडियो भी बनाया है तो हो सकती है। इतना तो ये स्थानीय लोगों को लूट रहे हैं, बाहर से आने वालों से तो ये मनमर्जी का पैसा लेते हैं।
वैसे तो उत्तराखण्ड में लगभग सभी सरकारी शराब की दुकानों पर ओवर रेट पर शराब बेचने के आरोप लगते रहते हैं, कुछ ही सौभाग्यशाली ग्राहक होंगे जिन्हें प्रिंट रेट पर शराब मिली हो। आबकारी विभाग एवं प्रशासन के अधिकारियों से शिकायत करने पर भी इनका कभी कुछ नहीं बिगडा़ है। इसीलिए इनके हौसले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहें हैं।
अगस्त्यमुनि में शराब की दुकान का वीडियो वायरल होना भी कोई नई घटना नहीं है। हालांकि सरकार द्वारा सभी शराब की दुकानों पर सीसीटीवी लगाने के निर्देश दिए गये हैं। और लगे भी हैं परन्तु वे कार्य कर रहे हैं या नहीं इसकी कोई जांच नहीं होती है। साथ ही कोरोना काल में हर दुकान पर मास्क पहनकर आने के निर्देश चस्पा किए है। जबकि सेल्समेन मास्क उतारने को कह रहा है। अगस्त्यमुनि में वीडियो वायरल होने के बाद अब यह देखना है कि इस पर कोई कार्यवाही भी होती है या नहीं।

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